शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला अंडीकछार में शिक्षको की कमी से कक्षा 6 से 8 के 59 विद्यार्थी इंग्लिश - संस्कृत की शिक्षा से वंचित
मनमोहन राठौर जिलाध्यक्ष ग्रामीण NSUI ने सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर उठाया सवाल
विष्णु कुमार यादव जिला ब्यूरो
कोरबा (सुघर गांव)। 19 नवंबर 2025, सरकार शिक्षा गुणवत्ता सुधार का दावा करती है, लेकिन कोरबा जिले के पाली विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत अंडीकछार की शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला अंडीकछार की हकीकत इन दावों को चुनौती देती है। यहाँ कक्षा 6 से 8 के 59 विद्यार्थी अब तक इंग्लिश और संस्कृत की पढ़ाई से वंचित हैं, क्योंकि इन विषयों के शिक्षक स्कूल में तैनात नहीं हैं। नवम्बर माह शुरू हो चुका है, लेकिन बच्चों ने साल भर में एक भी दिन इंग्लिश और संस्कृत की कक्षा नहीं देखी। स्कूल में कुल 03 शिक्षक पदस्थ हैं,जो केवल हिंदी, गणित और विज्ञान जैसे विषय पढ़ा रहे हैं।
किसके भरोसे पढ़ाई करें बच्चे
अंडीकछार गाँव के अधिकतर बच्चे एसटी, एससी और निम्न आय वर्ग से हैं, जिनके लिए अंग्रेजी और संस्कृत जैसे विषयों का मजबूत आधार बेहद जरूरी है। शिक्षक न होने से इन बच्चों का शैक्षणिक भविष्य अंधकार में धकेला जा रहा है।
प्रधान पाठक जयप्रकाश सूर्यवंशी का कहना
“विभाग को कई बार मांग भेजी गई है, पर शिक्षक की नियुक्ति अब तक नहीं हुई। फिलहाल हम अपने स्तर पर बच्चों को पढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।”
ग्राम प्रतिनिधि और NSUI का मोर्चा
उप सरपंच उमेश श्रीवास ने बताया कि उन्होंने शिक्षक की कमी की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी थी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी बीच NSUI जिलाध्यक्ष ग्रामीण मनमोहन राठौर ने सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर तीखा हमला बोला - “डबल इंजन की सरकार शिक्षा जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था को पूरी तरह नजरअंदाज कर रही है। स्कूलों में शिक्षक नहीं, पर भट्टी में दारू का स्टॉक हमेशा पूरा रहता है। बच्चों के भविष्य से बड़ा कोई मुद्दा नहीं—पर शासन की चुप्पी चिंताजनक है।”
खंड शिक्षा अधिकारी का दावा
खंड शिक्षा अधिकारी श्यामानंद साहू ने स्वीकार किया कि माध्यमिक शाला में 03 शिक्षकों का ही प्रावधान है और इंग्लिश-संस्कृत शिक्षक की कमी की जानकारी उच्च स्तर पर भेजी जा चुकी है।
सरपंच की सक्रियता और चिंता
सरपंच अनीता कोराम और सरपंच प्रतिनिधि अमीर कोराम ने भी बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए शिक्षक नियुक्ति की मांग की और कहा कि बिना सुधार के दर्जनों बच्चों की नींव कमजोर हो जाएगी।
बच्चों का भविष्य दांव पर
राज्य सरकार शिक्षा सुधार के बड़े दावे कर रही है, लेकिन अंडीकछार जैसे स्कूलों में वर्षों से विषय शिक्षकों की कमी ग्रामीण शिक्षा की वास्तविक तस्वीर सामने लाती है। अगर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई, तो इन बच्चों के भविष्य पर गंभीर असर पड़ेगा।
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