ग्राम पंचायत मुड़ापार के आवास पर बड़ा खुलासा, बी.एफ़.टी. प्रमोद जाटवर पर प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में भारी गड़बड़ी के आरोप,क्या मुख्यमंत्री के आदेशों का होगा पालन या चुप्पी साधेगी प्रशासन ।


प्रमोद कुमार बंजारे संभाग ब्यूरो चीफ 

कोरबा ( सुघर गांव )। जिले के पाली ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत मुड़ापार में आवास निर्माण को लेकर एक बड़ा घोटाला सामने आया है,आपको बता दे,कि मिली जानकारी के अनुसार,बी एफ टी प्रमोद जाटवर द्वारा कई हितग्राहियों के आवास निर्माण नहीं होने के बावजूद फर्जी तरीके से अन्य मकानों की ( जिओटेक ) तस्वीरें अपलोड कर आवास निर्माण करा दिया गया है। और सूत्रों के अनुसार यह भी पता चला है,कि उसके एवज में भारी - राशि लेकर जियो टेक कर वसूली किया गया। प्रभावित हितग्राहियों में संतोष निर्मलकर, दिनेश साहू, संत राठौर, लखेश्वर पांडे, श्याम प्रसाद, जवाहर और गजेन्द्र यादव का नाम सामने आया है। आपको बता दे,कि आवास के इस मामले को लेकर नितीश पांडे द्वारा जनदर्शन में जाकर शिकायत किया गया था,जिसके शिकायत को संज्ञान में लेते हुएँ 02 सितम्बर 2025 को जिला स्तर से जांच अधिकारियों की टीम—शांति लाल देवांगन, अनुराग चौरसिया, सुरेश कुमार और अभिषेक चौरसिया—ने मौके पर जांच की। जांच में यह तथ्य सामने आया कि कई आवास बने ही नहीं हैं, फिर भी पुरा राशि निकाल लिया गया है । किसी का आवास 6 से 8 फीट का अधूरा ढांचा बना हुआ है, तो कहीं आवास का निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हुआ,और कई में दूसरे के मकान में दूसरे का फोटो खींचा गया है।स्थानीय सूत्रों का कहना है कि इस फर्जीवाड़े में 25 से 30 हजार रुपए तक की अवैध वसूली की गई, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। आरोप यह भी है कि बी.एफ़.टी. प्रमोद जाटवर पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों से अभद्र भाषा का प्रयोग करता है,और किसी की बात सुनने को तैयार नहीं होता। आपको बता दे,कि मुख्यमंत्री ने पहले ही साफ निर्देश दिए थे।कि प्रधानमंत्री आवास योजना में कोई गड़बड़ी पाए जाने पर सीधे कलेक्टर तक जिम्मेदारी तय होगी। इस पूरे मामले में ग्राम पंचायत मुड़ापार के पूर्व सरपंच विजय मरावी की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग किया है,कि भ्रष्टाचार और लापरवाही में लिप्त बी.एफ़.टी. प्रमोद जाटवर की सेवा तत्काल समाप्त किया जाए, ताकि योजनाओं में पारदर्शिता और जनता का विश्वास कायम रह सके,अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन पर टिकी हुई है।

"क्या आवास घोटाले करने वाले पर होगी कार्यवाही या दब जाएगी फाईले ?

"क्या मुख्यमंत्री के निर्देशों का होगा पालन या प्रशासन साधलेगी चुप्पी ?

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