रक्षाबंधन के अगले दिन भी बहनों का प्यार बरकरार – वीर सैनिक भाई की कलाई सजी रक्षा सूत्र से।


 प्रमोद कुमार बंजारे संभाग ब्यूरो चीफ 

बिलासपुर (सुघर गांव)। जिले अंतर्गत ग्राम पंचायत जेवरा नावापारा में सरहद की हिफाज़त में डटे भारतीय सेना के जवान न केवल देश की सुरक्षा के प्रहरी हैं, बल्कि अपने परिवार और संस्कारों के भी सच्चे रक्षक होते हैं। ग्राम पंचायत जेवरा नावापारा के वीर सपूत रघुराज सिंह नेताम (उम्र 26 वर्ष, पिता भोजराम नेताम, माता लक्ष्मीन बाई) इसी मिसाल को जीते हैं। मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले रघुराज ने जीवन की कठिन परिस्थितियों और एक बार की असफलता के बावजूद हार नहीं मानी। अटूट संकल्प और अथक मेहनत के बल पर उन्होंने आर्मी के पैरामेडिकल फोर्स में चयन हुआ और पीछे 7 वर्षों से सेवा रत हैं। वर्तमान में उनकी तैनाती आगरा में है। बीते 9 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन वे अपनी ड्यूटी के कारण घर नहीं आ सके। लेकिन जैसे ही छुट्टी मिली, 10 अगस्त की सुबह 10 बजे वे अपने गांव पहुंचे। घर पहुंचते ही माता-पिता और बहनों की आंखें खुशी और गर्व के आंसुओं से भर आईं। बड़ी बहन रितुकिरण नेताम, सुमन नेताम, सरस्वती नेताम ,जयंती नेताम और कुसुम नेताम ने उत्साह और प्रेम के साथ भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा। रक्षाबंधन के अगले दिन भी वही उल्लास और अपनापन पूरे घर में गूंज उठा।

रघुराज सिंह ने भावुक होकर कहा :– “देश सेवा मेरा परम कर्तव्य है, और परिवार का आशीर्वाद मेरी सबसे बड़ी ताकत। सरहद पर खड़े होकर मैं सिर्फ अपने गांव का नहीं, पूरे भारत का सिपाही हूं।” गांव के लोग भी रघुराज की जज़्बे और त्याग पर गर्व करते हैं। उनका कहना है कि ऐसे वीर सैनिक न केवल देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं, बल्कि अपने संस्कार और रिश्तों को भी संजोकर रखते हैं। रघुराज जैसे सपूत ही भारत की असली ताकत हैं, जिनकी वर्दी में सिर्फ अनुशासन और साहस ही नहीं, बल्कि अपनों के लिए अथाह प्रेम भी बसा होता है।

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