खबरों का असर
प्रमोद कुमार बंजारे संभाग ब्यूरो चीफ
कोरबा ( सुघर गांव न्यूज ) जिले के ब्लॉक पाली अंतर्गत ग्राम पंचायत - धतुरा में 1 माह से पानी भरा हुआ था,आपको बता दे,कि ग्राम पंचायत धतूरा की सरपंच बृजबाई एवं समस्त ग्रामवासियों ने मिलकर अनुभागीय अधिकारी (एसडीएम) को एक पत्र सौपे थे,पत्र के आधार पर अनुभागीय अधिकारी (एसडीएम) ने पटवारी को मौके जाँच पर भेज दिए थे। ग्रामीणों का कहना था,कि पटवारी आए थे। ग्रामीणों ने मांग किया था ,कि इस समस्या से हमे शासन प्रशासन जल्द छुटकारा दिलवाए,और बच्चों को शिक्षा की ओर अग्रसर करने की मांग किया था। जिसपर संज्ञान में लेते हुएँ 5 अगस्त 2025 को नायब तहसीलदार हरदी बाजार और थाना प्रभारी हरदी बाजार एवं पटवारी ग्राम धतूरा हल्का नंबर 17 जिनके मौजूदगी में आज निराकरण सरपंच प्रतिनिधि पितर सिंह मरकाम एवं सरपंच प्रतिनिधि का बड़ा भाई घासी सिंह मरकाम द्वारा पानी का निराकरण के लिए चैतराम केवट भूतपूर्व उप सरपंच और वर्त्तमान वार्ड क्रमांक 2 के पंच के घर में मिल मिलाव के बाद किया गया है। साथ में रोड के पानी का निराकरण किया गया, इस बीच उपस्थित लक्ष्मी प्रसाद तिवारी, केवल राम केंवट, जगत राम केंवट, नकुल सिंह पोर्ते, चिंताराम केंवट रवि राठौर,खोलबाहरा केंवट,सुखसागर केंवट एवं अन्य लोग उपस्थित रहे।आपको बता दे,कि 31 जुलाई 2025 को इस खबर को सुघर गांव न्यूज में प्रकाशित किया गया था। स्कूल जाने वाले बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। आपको बता दे,कि मुख्य गली में भारी मात्रा में बरसात का पानी भरा हुआ था। जिससे आम जनजीवन व स्कूली बच्चें पुरी तरह प्रभावित हो रहे थे। सरपंच प्रतिनिधि,पंच व ग्रामीणों ने बताया था कि बच्चों,महिलाओं और बुजुर्गों को आवागमन में भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। आपको बता दे यह जल भराव विजय आयाम पिता रामा आयाम (जाति गोड़) के मकान से लेकर बसंत कौशिक पिता दादू लाल कौशिक (जाति कुर्मी) के मकान तक पूरी गली जलभराव से घिर चुकी थी।ग्रामीणों ने बताया कि पहले यह बरसात की पानी केवल राम केवट पिता दशरिहा केवट (जाति केवट) की बाड़ी के माध्यम से निकल जाता था,लेकिन उस निकास मार्ग को पुरी तरह से बंद कर दिया गया था। जिससे अब पानी की निकासी संभव नहीं था। और गली में जलभराव की स्थिति गंभीर बन चुकी थी। स्कूल जाने वाले बच्चों और दैनिक जरूरतों के लिए बाहर निकलने वाले ग्रामीणों को भरे हुएँ गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता था। अनुभागीय अधिकारी (एसडीएम) ने ग्रामीणों की समस्या को संज्ञान में लेते हुएँ। इस परेशानी से ग्रामीणों को छुटकारा दिलवाए है।
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