गरियाबंद (सुघर गांव)। 18 जुलाई 2025,
जिला प्रशासन द्वारा पटवारियों की कार्यशैली पर कड़ाई से निगरानी और बार-बार सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बावजूद, कुछ पटवारी अपनी मनमानी और अनैतिक गतिविधियों से बाज नहीं आ रहे। इसका ताजा उदाहरण राजिम हल्का नंबर 23 की पटवारी भारती देवांगन के खिलाफ सामने आया है, जिन पर एक किसान ने रिश्वत मांगने और कार्य में लापरवाही बरतने का गंभीर आरोप लगाया है। ग्राम पंचायत बकली के किसान टिकेश आडिल ने इस मामले में एसडीएम को लिखित शिकायत देकर त्वरित और कड़ी कार्रवाई की मांग की है। टिकेश आडिल ने अपनी शिकायत में बताया कि उनके पिता के निधन के बाद उन्होंने जमीन के नामांतरण के लिए तहसील कार्यालय में आवेदन किया था। तहसीलदार ने इस आवेदन को स्वीकृत कर नामांतरण का आदेश जारी कर दिया था। लेकिन जब टिकेश पटवारी भारती देवांगन के पास आवश्यक दस्तावेज और ऋण पुस्तिका दिए और पटवारी ने उनसे 2000 रुपये की रिश्वत मांग की। आर्थिक रूप से कमजोर टिकेश इस राशि का भुगतान करने में असमर्थ रहे। इसके बाद, पटवारी ने न केवल उनके दस्तावेज पूरे करने में आनाकानी की, बल्कि बी -1 और पी - 2 जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए।
यही नहीं, पटवारी ने नामांतरण से संबंधित दस्तावेजों पर डिजिटल हस्ताक्षर तक नहीं किया, जिसके कारण टिकेश का किसानी कार्य पूरी तरह ठप हो गया। टिकेश ने बताया कि जब उन्होंने पटवारी से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की, तो पता चला कि पटवारी ने उनका नंबर ही ब्लॉक कर दिया है। इस व्यवहार से पीड़ित किसान और उनका परिवार मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित महसूस कर रहा है। टिकेश का कहना है कि एक जिम्मेदार पटवारी का कर्तव्य है कि वह आम जनता और विशेष रूप से किसानों की समस्याओं का त्वरित समाधान करे,लेकिन इस मामले में ठीक इसके उलट हो रहा है। इस मामले ने स्थानीय स्तर पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। क्षेत्र की जनपद पंचायत सदस्य पूजा मुकेश भारती ने भी इस घटना को गंभीरता से लिया और किसान की परेशानी को देखते हुए पटवारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। जनपद पंचायत सदस्य पूजा मुकेश भारती ने एसडीएम को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें उन्होंने जांच और त्वरित कार्रवाई की मांग की। यह मामला जिला प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। जिला कलेक्टर द्वारा बार-बार पटवारियों को अपनी कार्यशैली सुधारने और पारदर्शिता बरतने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन इस तरह की शिकायतें प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाती हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि एसडीएम इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं। क्या पटवारी भारती देवांगन के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाया जाएगा, या यह शिकायत भी फाइलों में दबकर रह जाएगी? इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक सेवाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं।
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