नर्सिंग होम एक्ट के तहत बेड और डॉक्टर अनुपात सुनिश्चित कर समस्त अस्पतालों के विरुद्ध जांच व कार्यवाही की मांग– छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना.

समस्त संभावित शासकीय व निजी अस्पतालों में जांच व कार्यवाही नहीं होने की स्थिति में होगी– जन आंदोलन


जावेद अली आज़ाद/ प्रमुख ब्यूरो छग.

कोरबा। कोरबा जिले व जिले के समस्त क्षेत्रों में शासकीय एवं प्राथमिक तथा प्राइवेट चिकित्सालय स्थापित कर संचालन की जा रही है। जिनमें जिला अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, और निजी अस्पताल शामिल हैं। ।।अस्पतालों के सबसे सामान्य प्रकार सामान्य अस्पताल, सामुदायिक अस्पताल, विशेष अस्पताल, सरकारी वित्त पोषित अस्पताल और लाभ-प्राप्त अस्पताल हैं। जिले में इतनी बड़ी तादाद में अस्पताल होने के बावजूद बेड और डॉक्टरों की कमी हमेशा अस्पतालों में बनी रहती है।

नर्सिंग होम एक्ट के नियमों का उल्लंघन करने पर पूर्व में श्वेता नर्सिंग होम के ऊपर हुई थी कार्यवाही–

कोरबा कलेक्टर के द्वारा नर्सिंग होम एक्ट के तहत नियमों का उल्लंघन करने पर पूर्व में त्वरित कार्यवाही करते हुएश्वेता नर्सिंग होम का संचालन 15 दिवस के लिए स्थगित कर दिया गया था। परंतु यह मामला किसी एक अस्पताल अन्यथा मल्टी स्पेशलिस्ट नर्सिंग होम से संबंधित नहीं है और भी चिकित्सालय व नर्सिंग होम, एक्ट के नियमों का संभावित घोर उल्लंघन कर रहे हैं। 

गैर राजनीतिक संगठन का जिले के अन्य संचालित अस्पतालों के विरुद्ध गंभीर आरोप–

छत्तीसगढ़ नर्सिंग एक्ट 2013 के अनुसार–

1 अस्पताल में जितने बेड होंगे उतने डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ सुनिश्चित होना।

2 नर्सिंग होम एक्ट के तहत समस्त अस्पतालों में डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ की जांच। 

3 अस्पतालों की रजिस्ट्रेशन,लाइसेंस और वैधता की जांच।

4 आईसीयू ऑपरेशन थिएटर एवं संक्रमण नियंत्रण की मानक व्यवस्था।

5 योग्य चिकित्सक एवं पैरामेडिकल स्टाफ की उपलब्धता। 



छत्तीसगढ़िया क्रान्तिसेना के जिला संयोजक अतुल दास महंत ने कोरबा जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए तीखी और स्पष्ट शब्दों में कहा है कि–


जिस संस्थानों में नर्सिंग होम एक्ट के नियमों के विरुद्ध किए जा रहे उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित संस्थानों के संचालन पर रोक लगाने व जांच कर कठोर कार्रवाई की मांग की गई है तथा मरीजों की सुरक्षा व जनहित से जुड़े गंभीर मामले को ध्यान आकर्षित करते हुए इस मामले को लेकर शीघ्र कार्रवाई की मांग की गई है अन्यथा कारवाही नहीं किए जाने की स्थिति में मैदानीय स्तर पर गैर राजनीतिक संगठन छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना जिले में आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।

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