पत्थलगांव के चिलडरापारा में शराब दुकान खुलने व शराब बिक्री के विरोध में हजारों ग्रामीणों ने किया शांतिपूर्वक धरना प्रदर्शन..
छत्तीसगढ़िया क्रांतिसेना का मैदानीय स्तर पर शराब भट्ठी खुलने का विरोध प्रदर्शन में समर्थन..
पत्थलगांव में शासकीय शराब खुलने से आबादी क्षेत्र में शराब की बिक्री होगी सायं सायं..
रिपोर्ट– जावेद अली आज़ाद
पत्थलगांव (सुघर गांव)। छत्तीसगढ़ राज्य को विकसित करने के बजाय छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा शराब की दुकानें जगह जगहों पर धड़ल्ले से खोली जा रही है। शराब दुकान खोलने के लिए निर्धारित जगहों पर कुछ नियम कानून भी होते हैं परंतु नियमों को अनदेखा करते हुए संबंधित क्षेत्र के सक्षम अधिकारियों के द्वारा शराब दुकान खुलने व शराब बिक्री को लेकर ग्रामीणों के द्वारा विरोध प्रदर्शन करने बावजूद संबंधित ग्राम के ग्रामीणों की बात तक सुनी नहीं जा रही है।
आपको बता दें कि ऐसा ही मामला पत्थलगांव के क्षेत्र चिलडरा ग्राम का है जहां कुछ महीनो से लगातार स्थानीय ग्रामीणों के द्वारा अवैध शराब दुकान खुलने को लेकर विरोध कर रहे थे। शराब भट्टी को बंद करने को लेकर शासन प्रशासन से लेकर छत्तीसगढ़ के सक्रिय संगठन में भी इस बात को रखी गई। परंतु प्रशासन के द्वारा इस मामले को लेकर किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की गई। शराब भट्टी में शराब की बिक्री धड़ल्ले से होने लगी। आबादी क्षेत्र में शराब भट्टी खुलने से स्थानीय निवासियों तथा स्कूली बच्चे और राहगीरों को तरह-तरह की परेशानियां होने लगी। शराब की बिक्री और शराबियों के झुंड तथा असर असामाजिक तत्व के लोग उस क्षेत्र में गंदगी फैलाने लगे जिससे कि स्थानीय ग्रामीणों में आक्रोश होने लगी। और यही आक्रोश की वजह से ग्रामीणों काविरोध, विरोध प्रदर्शन का रूप ले लिया।
ज्ञात रहे कि किसी भी दुकान खुलवाने को लेकर चाहे मंदिर, स्कूल, शराब भट्टी, हॉस्पिटल अन्य नेशनल हाईवे मार्ग से 220 मीटर की दूरी पर होनी चाहिए। परंतु शराब भट्टी महज 30 से 40 मीटर की दूरी पर है, दूसरी ओर उस क्षेत्र के एसडीएम का कहना है कि यह आबादी क्षेत्र नहीं है। वैध तरीके से शराब दुकान खोली गई है। अगर किसी को आपत्ति है तो वह अपना राशन कार्ड, आधार कार्ड, जाति, निवास प्रमाण पत्र दिखाने की मांग की गई।
पत्थलगांव एसडीएम और छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना के मध्य की चर्चा..–
जानकारी मिली है कि पत्थलगांव ग्राम चिलडरापारा एक आबादी क्षेत्र है। नेशनल हाईवे मार्ग से शासकीय शराब दुकान महज 30,40 मीटर की दूरी पर है। धरना प्रदर्शन के दौरान छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना के अधिकारियों ने जब एसडीएम और उनके सहयोगियों से चर्चा की तो उनका कहना है कि ग्रामीणों के साथ खड़े होकर विरोध प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे हो आप लोग कमीशन खोर हो, ग्रामीणों को बरगलाकर विरोध प्रदर्शन करवा रहे हो कहकर अपमानित किया गया। जबकि जवाब में छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना का कहना था कि हमारा गैर राजनीतिक संगठन जल, जंगल और जमीन के लिए लगातार कई वर्षों से लड़ाई लड़ती आ रही है। छत्तीसगढ़ियों का हक, अधिकार और पांचवी अनुसूची का हवाला देते हुए शासकीय अधिकारियों को शासकीय शराब भट्टी को संबंधित जगह से हटाने की मांग की गई है। अब सोचने वाली बात यह है कि नियम, कानून को अनदेखा करते हुए स्थानीय शासकीय अधिकारियों के द्वारा मनमाने तरीके से किसी भी जगह पर शराब भट्टी खुली जा रही है। और दारू की बिक्री चरम सीमा पर है। सामाजिक स्तर पर आबादी वाले क्षेत्र पर आम लोगों को शराबी बनाने का कार्य किया जा रहा है। इस मार्ग पर स्कूली बच्चे और स्थानीय राहगीर आना-जाना करते हैं। शराबियों को लगातार शराब परोसी जा रही है साय साय..शराबियों का झुंड भट्टी में लगातार बनी रहती है, जिससे कि इस जगह पर कभी भी किसी भी प्रकार की कोई अप्रिय घटना घटित हो सकती है। छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय अगर इस गंभीर मामले को संज्ञान में नहीं लेते हैं तो छत्तीसगढ़ की जनता का चुनाव के समय का असर आने वाले खबर में देखने को मिल सकती है।
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