आइये जानते है उनके जीवन की संघर्षों को
कांशीराम का जन्म 15 मार्च 1934 को पंजाब प्रांजिन्हें बहुजन नायक के नाम से भी जाना जाता है। कांशीराम एक भारतीय राजनीतिज्ञ और समाज सुधारक थे, जिन्होंने बहुजनों , भारत में जाति व्यवस्था के सबसे निचले स्तर पर अछूत समूहों सहित पिछड़ी या निचली जाति के लोगों के उत्थान और राजनीतिक लामबंदी के लिए काम किया।
गौरतलब है कि बचपन या युवावस्था के दौरान उन्हें ज्यादा सामाजिक भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा था। कांशीराम पुणे में विस्फोटक अनुसंधान और विकास प्रयोगशाला के कार्यालय में शामिल हुए। यह वह समय था जब उन्होंने पहली बार जातिगत भेदभाव का अनुभव किया और 1964 में वे एक कार्यकर्ता बन गए। उनके प्रशंसक बताते हैं कि बीआर अंबेडकर की पुस्तक "जाति का विनाश " पढ़ने और एक दलित कर्मचारी के खिलाफ भेदभाव को देखने के बाद वे इस काम के लिए प्रेरित हुए, जो अंबेडकर के जन्मदिन का जश्न मनाने के लिए छुट्टी मनाना चाहता था। कांशीराम बीआर अंबेडकर और उनके दर्शन से बहुत प्रेरित थे।
बाद में, 1981 में, कांशीराम ने दलित शोषित समाज संघर्ष समिति (DS4) के नाम से एक और सामाजिक संगठन बनाया। उन्होंने दलित वोट को एकजुट करने की अपनी कोशिश शुरू की और 1984 में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की स्थापना की। उन्होंने अपना पहला चुनाव 1984 में छत्तीसगढ़ की जांजगीर-चांपा सीट से लड़ा । बसपा को उत्तर प्रदेश में सफलता मिली, शुरुआत में दलितों और अन्य पिछड़े वर्गों के बीच की खाई को पाटने के लिए संघर्ष करना पड़ा लेकिन बाद में मायावती के नेतृत्व में इस खाई को पाट दिया गया। और कांशीराम को 1994 में उन्हें दिल का दौरा पड़ा, 1995 में उनके मस्तिष्क के धमनी में खून का थक्का जम गया और 2003 में लकवाग्रस्त स्ट्रोक हुआ। फिर 9 अक्टूबर 2006 को 72 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से नई दिल्ली में उनका निधन हो गया। उनकी इच्छा के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार बौद्ध परंपरा के अनुसार किया गया, जिसमें मायावती ने चिता को अग्नि दी। उनकी राख को एक कलश में रखा गया और प्रेरणा स्थल पर रखा गया, उन्हीं के जीवन की संघर्षो को याद करते हुए पचोरी गाँव लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर शत शत नमन किया। इस अवसर पर महेश सूर्यवंशी, जागेश्वर सूर्यवंशी, अशोक कुमार लाठिया, राजकुमार लाठिया, हिमांशु पांडेय, दीपक कुमार सूर्यवंशी, रामधन सूर्यवंशी, रेशम रोहिदास, एवं भूतपूर्व उपसरपंच राधे सारथी सहित भारी संख्या में ग्राम नागरिकगण उपस्थित थे।
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