बिलासपुर (सुघर गांव) 30 सितंबर 2024। छत्तीसगढ़ के पत्रकारों ने राज्य में लगातार बढ़ रहे उत्पीड़न और शासन - प्रशासन द्वारा अनदेखी के खिलाफ एकजुट हो कर 02 अक्टूबर को एक विशाल धरना प्रदर्शन का आयोजन छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कर रहें है। यह विरोध प्रदर्शन संयुक्त पत्रकार महासभा छत्तीसगढ़ के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य राज्य में पत्रकारों की सुरक्षा,पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने व स्वतंत्रता और सम्मान की मांग करना प्रमुख हैं,जो लंबे समय से उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
प्रदेश में पत्रकारों का उत्पीड़न बना आज के दौर में गंभीर मुद्दा
छत्तीसगढ़ में बीते कुछ समय से पत्रकारों पर उत्पीड़न के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। पत्रकारों को बिना वजह परेशान कर धमकियां देकर कई बार उनके खिलाफ फर्जी मामलों में फंसाने की कूटरचना किया जाता रहा है। इसके बावजूद शासन - प्रशासन द्वारा पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है,जो पत्रकार समुदाय में आक्रोश का मुख्य कारण बना हुआ है। इस आक्रोश को व्यक्त करने के लिए यह प्रदर्शन प्रदेश स्तरीय रायपुर में आयोजित किया जा रहा हैं।
गॉस मेमोरियल ग्राउंड रायपुर राजधानी में पूरे प्रदेश भर से हजारों से अधिक संख्या में पत्रकार शामिल होकर दिखाएंगे एकजुटता
यह विशाल प्रदर्शन रायपुर के गॉस मेमोरियल ग्राउंड, आकाशवाणी चौक में आयोजित किया जा रहा हैं,जहां छत्तीसगढ़ प्रदेश भर से हजारों से अधिक संख्या में पत्रकार जुटेंगे। विभिन्न पत्रकार संगठनों ने इस प्रदर्शन में सक्रिय भूमिका निभाने का सहमति दी है,जिसमें छत्तीसगढ़ श्रमजीवी पत्रकार कल्याण संघ मस्तूरी जिला बिलासपुर के पत्रकार भी विशेष रूप से शामिल होंगे। इस मौके पर पत्रकारों ने अपने विचार साझा करते हुए राज्य में पत्रकारों के प्रति हो रहे अन्याय की कड़ी निंदा की।
पत्रकारों की सुरक्षा के लिए मुख्य मांगें
प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों ने शासन - प्रशासन के सामने अपनी मुख्य मांगें रखेंगे, जिनमें शामिल हैं - पत्रकारों की सुरक्षा के लिए ठोस कानून का निर्माण।
फर्जी मामलों में फंसाए गए पत्रकारों की जल्द रिहाई।
पत्रकारों को धमकाने या उत्पीड़न करने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई।
राज्य में स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता को बढ़ावा देने के लिए सकारात्मक वातावरण का निर्माण होना चाहिए। शासन - प्रशासन की चुप्पी पर सवाल।
पत्रकारों का कहना है कि उनकी सुरक्षा और स्वतंत्रता के मुद्दे पर शासन - प्रशासन की उदासीनता चिंता का विषय है। लगातार हो रहे उत्पीड़न और धमकियों के बावजूद शासन - प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा हैं, जिससे पत्रकारों में असुरक्षा का माहौल बन हुआ है। पत्रकारों की एकजुटता को इस प्रदर्शन में राज्य के पत्रकारों की एकजुटता और शक्ति को दिखाए जाने के प्रयास किए जाएंगे। विभिन्न जिलों और शहरों ग्रामीण अंचल क्षेत्रों से पत्रकारों ने इस विशेष आयोजन में भाग लेने की सहमति देकर इस बात को साबित कर दिया हैं कि पत्रकारिता पर किसी भी तरह के हमले को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी का कहना हैं कि पत्रकार समाज का चौथा स्तंभ है और इसकी स्वतंत्रता और सुरक्षा पर हमला,लोकतंत्र पर हमला है। आगे की रणनीति संयुक्त पत्रकार महासभा ने स्पष्ट किया है कि यदि शासन - प्रशासन जल्द ही उनकी मांगों पर विचार नहीं करता है,तो आगे और भी कठोर कदम उठाए जाएंगे। पत्रकारों ने अपने संगठनात्मक ढांचे को और मजबूत करने तथा पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संगठित प्रयास करने की प्रतिबद्धता जताया हैं।
यह प्रदर्शन पत्रकारों के सम्मान, अधिकारों और सुरक्षा की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
0 Comments