प्रमोद कुमार बंजारे संभाग ब्यूरो चीफ
बिलासपुर ( सुघर गांव )। छत्तीसगढ़ के न्यायधानी में शासकीय कर्मचारियों के सम्मान और सुरक्षा को लेकर अब आर-पार की जंग छिड़ गई है। कर्मचारी संगठनों ने प्रशासन को दोटूक संदेश देते हुए साफ कर दिया है कि बिना किसी ठोस सबूत के कर्मचारियों पर कोई भी दंडात्मक कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
षड्यंत्र का आरोप
रोहित तिवारी ने खोला मोर्चा
प्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ के नेता रोहित तिवारी ने इस पूरे घटनाक्रम को एक 'सुनियोजित षड्यंत्र' करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ समय से अंकित गौरहा द्वारा शासकीय कर्मचारियों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। बार-बार झूठी शिकायतों और निराधार आरोपों के जरिए कर्मचारियों पर मानसिक दबाव बनाया जा रहा है, जिससे सरकारी कामकाज प्रभावित हो रहा है। सुनील यादव मामला जांच पर उठे सवाल विवाद का केंद्र प्रदेश महामंत्री सुनील यादव से जुड़ा मामला है। जानकारी के अनुसार, जिला स्तर की चार सदस्यीय समिति पहले ही अपनी जांच में सुनील यादव पर लगे सभी आरोपों को बेबुनियाद और निराधार बता चुकी है। बावजूद इसके, दोबारा जांच के लिए दबाव बनाना और नई समिति गठित करना संघ की नजर में संदेह के घेरे में है। रोहित तिवारी का कहना है कि शासन स्तर पर लगातार पत्राचार और दुष्प्रचार करना केवल कर्मचारियों को भयभीत करने की कोशिश है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कर्मचारी संघ ने कलेक्टर बिलासपुर के माध्यम से मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपा है। संघ की प्रमुख मांगें हैं:
1. बिना सत्यता और प्रमाण के कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई न हो।
2. झूठी शिकायतें कर परेशान करने वाले व्यक्तियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
3. कर्मचारियों को मानसिक प्रताड़ना से सुरक्षा दी जाए।
आंदोलन की दी चेतावनी
कर्मचारी संघ ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कर्मचारियों को निशाना बनाना बंद नहीं किया गया, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। संघ ने कहा कि अगर जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो प्रदेश भर के कर्मचारी उग्र आंदोलन की राह चुनने को मजबूर होंगे।अब सबकी नजरें प्रशासन और शासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि वे इस बढ़ते असंतोष को कैसे शांत करते हैं।
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