मजदूरों के एचपीसी रेट में डाला जा रहा डॉका, पीएफ,बोनस से है वंचित, जिला प्रशासन के मिलीभगत की आशंका..!!
जावेद अली आज़ाद/ ब्यूरो प्रमुख.
कोरबा(सुघर गांव)। मानिकपुर कोयला खुली खदान में ठेकाश्रमिकों को हाई पावर कमेटी की ओर दी जाने वाली एचपीसी दर/ मासिक पेमेंट जोकि 1350 रुपए निर्धारित की गई है परंतु कुछ निजी कंपनियों के द्वारा सीधे तौर पर 961 तथा 833 रुपए मासिक वेतन के रूप में मजदूरों को कैश रुपए उनके हाथों में थमाई जा रही है। एसईसीएल में मजदूरों का हाजिरी भी नहीं लगवाई जा रही। सेफ्टी सुरक्षा से संबंधित एसईसीएल के अधिकारियों द्वारा निजी कंपनियों को कोई सामग्री उपलब्ध नहीं कराई जा रही। वाहन चालकों के लाइसेंस, बीटीसी अन्य दस्तावेजो की जांच नहीं की जा रही। जिसकी शिकायत कोरबा कलेक्टर और एसपी से भी की गई है परंतु अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। ग्राउंड रिपोर्टिंग करने के दौरान मजदूरों ने कोरबा जिला प्रशासन पर उंगली उठाते हुए मिली भगत की बात कही है।
मानिकपुर भारीभरकम प्रदूषण से है प्रभावित–
कोयला खदान परिसर में गाड़ियों को तेज रफ्तार से चलाई जा रही है। जिससे कि अत्यधिक धूल, डस्ट वातावरण में फैलने से खदान की सड़कों में दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है। एसईसीएल के द्वारा समय पर पानी का छिड़काव भी नहीं कराया जा रहा, जिससे की समुचित क्षेत्र के पर्यावरण प्रदूषित है। पर्यावरण विभाग भी मामले पर संज्ञान नहीं ले रही। पूरा का पूरा जिला प्रशासन से संबंधित विभाग के ऊपर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
बता दे कि निजी कंपनियों के विरुद्ध ठेका मजदूरों ने जिला प्रशासन को शिकायत की थी परंतु, जिला प्रशासन कार्यवाही करने के बजाय चुप्पी साधते हुए मौन होकर हाथ पर हाथ धरे हुए बैठी है। ठेका कर्मियों का आरोप है कि प्रगति, एससीसी कंपनी के द्वारा लगातार एचपीसी मासिक पेमेंट राशि बैंक अकाउंट में ना डालकर कटौती करते हुए मजदूरों के जेब में सीधा डांका डाला जा रहा है। वही बिना बायोमेट्रिक के मजदूरों से काम करवाई जा रही है सीएमपीएफ/इपीएफ/बोनस की राशि ऑनलाइन नहीं दर्शाई जा रही। जिसे ठेका मजदूरों में भारीआक्रोश है। ठेका मजदूरों के द्वारा आने वाले समय में जिला प्रशासन कोरबा को उग्र आंदोलन करने की भी चेतावनी दी गई है।
गवर्नमेंट लेबर अपॉइंटमेंट डिपार्मेंट बिलासपुर–
एक कहावत है घी सीधी उंगली से नहीं निकलती जिसके लिए उंगली को टेढ़ा करना पड़ता है, मानिकपुर के मजदूर भी अब जागरूक हो गए हैं, अपने हक अधिकार के लिए किसी भी स्तर पर बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की बात कही गई है। यह मामला सीधे तौर पर, बिलासपुर एसईसीएल मुख्यालय,लेबर कोर्ट , कोयला मंत्रालय तथा संबंधित मीडिया के माध्यम से उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए दोषियों के ऊपर कड़ी कार्रवाई कराने की मांग की गई है।



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