रक्तदान को बनाया जनसेवा का मिशन, रामशरण श्रीवास को मिला "रक्तवीर" सम्मान 18 बार रक्तदान कर बने युवाओं के प्रेरणास्रोत

विष्णु कुमार यादव जिला ब्यूरो चीफ 

कोरबा (सुघर गांव)। समाजसेवा को अपना दायित्व मानकर मानवता की सेवा में निरंतर जुटे ग्राम रेंकी निवासी युवा रामशरण श्रीवास को कन्नौजिया श्रीवास समाज समिति द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में "रक्तवीर सम्मान" से सम्मानित किया गया। ग्राम बरगवां में आयोजित कार्यक्रम में समाज के पदाधिकारियों ने उनके उत्कृष्ट सामाजिक योगदान और रक्तदान के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों की सराहना की। महज 23 वर्ष की आयु में रामशरण श्रीवास 18 बार स्वैच्छिक रक्तदान कर चुके हैं। राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) से जुड़कर उन्होंने सेवा और समाजहित की जो सीख प्राप्त की, उसे आज जनकल्याण के कार्यों के माध्यम से निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं। क्षेत्र में वे एक जागरूक, सक्रिय और जनसेवा के लिए समर्पित युवा के रूप में पहचान बना चुके हैं।
18 बार किया स्वैच्छिक रक्तदान
जरूरतमंद मरीजों के लिए समय-समय पर रक्तदान कर कई परिवारों की उम्मीद और जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
युवाओं के बीच बने यूथ आइकॉन
रक्तदान, समाजसेवा और मानवीय कार्यों के माध्यम से वे युवा पीढ़ी को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
रामशरण श्रीवास का संदेश
"रक्तदान सबसे बड़ा जीवनदान है। यदि हम स्वस्थ हैं तो नियमित रक्तदान कर किसी जरूरतमंद की जिंदगी बचाने में योगदान देना चाहिए।"
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि रामशरण श्रीवास जैसे युवा समाज की अमूल्य धरोहर हैं, जिनकी सेवा भावना और मानवता के प्रति समर्पण नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है।

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